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मैं और तू

(When you have love in your heart , you will have peace in your mind ~ thelostmonk )

 

मैं बादल का घेरा हूँ

और तू रिमझिम सी वर्षा है

मैं बिखरा सा ऐक तिनका हूँ

और तू फूलो की छाया है

मैं मिट्टी की मूरत हूँ

तू ख़ुशियों की काया है ।

मैं दीपक का बाती हूँ

तू रौशनी की ज्वाला है ।

(Dedicated to one who once fall in love …..!!) 🌸💫💫

मैं कविता का “मोहन” हूँ

तू जोगन सी “मीरा” है

मैं “ललित” कला का इक राग हूँ

तू सम्पूर्ण संगीत की लीला है ।

मैं पतझड़ की सूखी टहनी हूँ

तू जीवन बसंत की “सतरंगी” है

मैं पनघट का बहता पानी हूँ

और तू झरनो की काया है ।

मैं क़ागज , कलम, किताब हूँ

और तू स्याही का दरिया है ..!

मैं रेत , पानी , मिट्टी हूँ

और तू जीवन का साया हैं ।

मैं बादल का घेरा हूँ

और तू रिमझिम सी वर्षा है ….!!

By ~ thelostmonk

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हैरान हूँ मैं

दोस्ती यारी और ज़िन्दगी के हिसाब मे

समझता नहीं हूँ फ़ायदे का सौदा

घाटों में घुट कर मुस्कराता खड़ा हूँ

आइने में खुद को देखकर हैरान हूँ मैं …….।।

छोटे छोटे क़िस्से , छोटी छोटी कहानियाँ

कब किताबों में ढल गयी पता ही नहीं चला

कितना आगे आ गया हूँ देखता हूँ कभी

तो सुकून के अहसास से हैरान हूँ मैं ……!!

ना शोहरत हासिल की , ना दौलत हासिल की

दो लफ्ज की तलाश में कुछ मोहब्बत हासिल की

बॉटता रहा ज़िन्दगी भर जिस उजाले की ताक़त

उसके खिले फूलों को खिलता देख हैरान हूँ मैं

कठिन वक़्त की डगर मे , जब भी लड़खड़ाया मैं

Dost Jindgi bhar 🌸

फिर से जिन्दा होने की वजह ढूँढ लाया मैं

लाखो ने कुछ कहा होगा , भुलाता गया मैं

जीने के इस अन्दाज़ से हैरान हूँ मैं …….!!!

दोस्ती यारी और ज़िन्दगी के हिसाब मे

समझता नही हूँ फ़ायदे का सौदा

घाटों मे घुट कर मुस्कराता खड़ा हूँ

आइने मे खुद को देख कर हैरान हूँ मैं …!!!

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हिसाब

जज़्बात की , फ़िदा की सबात मॉगता हूँ
ख्वाब के शिहाब का हिसाब मॉगता हूँ………!

वो फाजिल तेरी मोहब्बत का है , मेरे मौला
उसकी वफ़ा के इम्तहान का हिसाब मॉगता हूँ ……!

 

सरवत मोहब्बत , रहमत मॉगता हूँ
साक़ी इश्क़ का दीदार मॉगता हूँ……………!

ज़ख़्म की , सितम की , शिफ़ा मॉगता हूँ
दिलग्गी सुखान के जबाब मॉगता हूँ……….!

 

जज़्बात की , फ़िदा की सबात मॉगता हूँ
ख्वाब के शिहाब का हिसाब मॉगता हूँ…………!

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फ़िज़ा

फ़िज़ा

अब ना दूर जाऊँ इन रंगीन फ़िज़ाओं से

महकती हुई खुशबुओं की जैसे हवाओं से

जो ये बात कह रही है कहानियाँ

जी लिया हूँ जैसे हर उम्र , इनकी अदाओं से

ताउम्र जो क़ैद हुऐ ज़ंजीरों मे

आज तो उनकी भी जैसे

जश्न ऐ आज़ादी चला आया है

अब ना दूर जाऊँ इन रंगीन फ़िज़ाओं से

फ़िज़ा 🌸💫

नशा ये रूह का है , हुस्न की बात कहॉ है

ईश्क के दीदार का है , चॉद की बात कहॉ है

डूब जाऊँ अब कहीं भी , शौक़ मँझधार का है

राख हो जाऊँ या ख़ाक हो जाऊँ

नशा तेरे प्यार का है …….!!

अब ना दूर जाऊँ इन रंगीन फ़िज़ाओं से

महकती हुई खुशबुओं की जैसे हवाओं से

जो ये बात कह रही है कहॉनियॉ

जी लिया हूँ जैसे हर उम्र इनकी अदाओं से …।

ताउम्र जो क़ैद हुऐ ज़ंजीरों में

आज तो उनका भी जैसे

जश्न ऐ आज़ादी चला आया है

अब ना दूर जाऊँ इन रंगीन फ़िज़ाओं से

महकती हुई ख़ुश्बूओं की जैसे हवाओं से …..।।!!

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https://youtu.be/2ijeINrruC0

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अनकही ………Lalit Hinrek

अनकही

जो उकेरती थी ज़ेहन के ख़्वाबों को ,

वो तख्ती वो स्याही कहीं गुम हो गयी ।

जो बुनते थे आवारा परिन्दों के सपने ,

आवारगी 🌸💫

वो मिट्टी , वो बर्तन कहीं खो से गये ।

उन सपने से ख़ुद को हँसाने की चाहत ,

हिसाबों की उलझन में कहीं खो सी गयी ।

जो उकेरती थी ज़ेहन के ख़्वाबों को ,

वो तख्ती वो स्याही कहीं गुम हो गयी ।

कहानियों में देखी वो सच्ची मोहब्बत ,

किताबों के पन्नों से गुम हो गयी ।

वो दोस्ती , वो यारी , वो रिश्तों की रौनक़ ,

दूरियों मजबूरियो से धुमिल हो गयी।

जो उकेरती थी ज़ेहन के ख़्वाबों को ,

वो तख्ती, वो स्याही कहीं गुम हो गयी !

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घाटी के वासी …………Lalit Hinrek

ओ घाटी के वासी ,

यहॉ नदियॉ बहती है , कोयल गाती है

हवाऐं स्वच्छ प्राणवायु लाती है

रंगीन ऑसमा है , रवि की किरणें ऊर्जा देती है

किन्तु ,

यह मानवता कि दुर्बलता है कि वह मजबूर हुआ है ,

समझा ना प्रकृति को उसने व सुख से दूर हुआ है ।

फिर छोड़ दिया नदि नालों को ,

गॉव और तालाबों को

और पहुँच गया फिर शहरों तक ,

खोजता वह भोजन को ।

यहॉ भागदौड़ जीवनशैली को भरपूर जीया उसने ,

पॉचसितारा रौनक मे भी फीकापन महसूस किया उसने ।

मानवता , हमदर्दी को यहॉ सिमटते देखा है ,

मतलब व चालबाजी को यहॉ साथ लिपटते देखा है ।

वाहनों की धूं धूं ने प्राणवायु को विरल किया ,

बिल्डिंग के जालो ने पेड़ो से महरूम किया ।

ना रवि कि किरणे , ना स्वच्छ गगन

कभी विकराल धुंध , कभी धुंऑ धुऑ ।

किन्तु ,

ओ घाटी के वासी ,

Tons valley

यहॉ तो नदियॉ बहती है , कोयल गाती है ,

हवाऐं स्वच्छ प्राणवायु लाती है ,

रंगीन ऑसमा है , रवि की किरऩे ऊर्जा देती है ।

ओ घाटी के वासी ,

यहॉ नदियॉ बहती है ,कोयल गाती है ।