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शायर मेरी नज़र से

“शायर मेरी नज़र से”

१. बहक जाने दे ऐ वतन तेरी मोहब्बत मे
बस यही वो नशा है जो उतरता नही ।

२.   छुपा लेता है मुस्कुराकर हजारो गुप्तगू
ना जाने कितना मर्म दफ़ॉ है सीने मे ।

३.    उसकी निगाहों मे डूबे हो लाखों सवाल जैसे
न जाने किसे ढूँढती है , किसे चाहती है ।

४.      उनको शिकायत है हम बदलते नही
और हमको शिकायत उनके बदलने से है ।

५.    जिन्दा है लौ वो , कि सुलगती नही है
जलती है तन्हाई तो बुझती नही है ।

६.    लूट ले मेरे यार इस वक़्त की महफ़िल को
थम जाते है तूफॉ यहॉ , ज़िन्दगी की रफ्तार नही थमती ।

७.     बंदिशें ख़त्म कर दी , और आज़ाद हो गये
कभी इधर उड़ चले , कभी उधर उड़ चले
जिधर मन चला हम उधर चल पड़े ।!!।

८.      कल को आज बदलते हुऐ देखा है
कोयलों को भी हीरा बनते देखा है
वक़्त की बात है मेरे दोस्त
कि मजबूर भी मज़बूत हुआ करते है ,
शिद्दत से देख ऑसमॉ को ज़रा
सबसे बड़े अंधेरों से ही
सबसे बड़े उजाले हुआ करते है !!

९.     इस तरह वो मोहब्बत के अल्फ़ाज़ ढूँढते है
निगाहों मे वफ़ा की फ़िराक़ ढूँढते है
हम तो फ़क़ीर है जज़्बात की ज़मीन के
जो रेत मे भी वफ़ा की सैलाब ढूँढते है ।

१०.      कहीं दरिया बदल जाता है
कहीं दलदल बदल जाता है
तेरी मोहब्बत बदल जाती है
तेरा दिल बदल जाता है
मेरा क्या है ! मैं तो पानी हूँ
रेत हूँ और मिट्टी हूँ
जहॉ गिरता हूँ , मौसम बदल जाता है
मौसम बदल जाता है ।
११.    फ़रियादो से मंज़िले कहॉ मिलती है
हमने भी दुऑऐ हज़ार की थी ।

१२.     अब फ़ितरत की नब्ज़ पहचान ली है
कुछ कर गुज़रने की ठान ली है ।
१३.   यहॉ जीना है तो जी भर के जी ले
ग़ुजरे हुऐ ज़माने यहॉ वापस नही आते ।

१४.   हमेशा इसी मिट्टी मे रहना ‘ललित’
आसमा मे उड़ने वालों को ज़मीन नही मिलती ।

१५.  कुछ ऐसे इरादे हो ललित , कि ख्याल बदलते कारवाँ मे हो
निगाहें ज़मीन मे हो हमेशा , और तलाश ऑसमॉ मे हो ।