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बुद्ध का धम्म् और अंगूलीमाल

2500 साल पहले मगध राज्य मे ऐक बालक जिसका नाम अंहिसक था वह तक्षशिला मे अपनी शिक्षा दिक्षा ग्रहण कर रहा था । वह अपने सभी मित्रों मे सबसे अव्वल था जिससे जल्द ही वह समस्त आचार्यों का प्रिय हो गया । कुछ छात्र उसकी तरक़्क़ी से इतने दुखी हुये की उन्होंने बालक के प्रति षड्यन्त्र रचा और गुरूजनों को गुमराह कर बालक के ख़िलाफ़ भड़का दिया । गुरूजनों ने उसे दक्षिणा मे ऐक हज़ार मानव अंगुलियों को ऐकत्र करने की दक्षिणी मॉगी जिसके लिये उसे ऐक हज़ार मानव की हत्या करनी थी । वह गुरूकुल से शिक्षा छोड़ कर चला गया और ऐक ऐक करके मानवों की हत्या करता गया । मानव संख्या याद रखने के लिये वह मानव की ऐक अंगुली काट देता था और गले मे माला पहनने लग गया । धीरे धीरे सम्पूर्ण मगध /श्रावस्ती मे उसका ख़ौफ़ फैल गया और कालान्तर मे वह अंगूलीमाल के नाम से कुख्यात हुआ ।

वह हत्याऐं करता गया और करते करते नौ सौ निन्यान्वे हत्याऐ कर गया । अब उसका आख़िरी मानव बचा था और ऐक दिन ऐक बुढ़िया और ऐक सन्यासी जंगल के रास्ते मे उसके सामने आ गये । यह सन्यासी गौतम बुद्ध थे तथा बुढ़िया उसकी अपनी माता थी लेकिन मोह मे अंधा व्यक्ति अंगुलीमाल अपनी मॉ को भी नही पहचान पाया । वह हँसते हुये कहता है “हाहाहा , मेरे रास्ते मे दो लोग ऐक साथ आ गये अब मैं इस बुढ़िया की जान लूँ या इस संन्यासी की “

गौतम बुद्ध मुस्कुराते रहे और बोले , “ इस बूढ़ी औरत की हत्या मत करना , तुम मेरी जान ले सकते हो “

उनके आत्मविश्वास और तेज़ को देखकर अंगुलीमाल अंचभित था और ग़ुस्से मे आकर बोला , “ ऐ संन्यासी , पूरा इलाक़ा मेरे नाम से थरथराता है और तुम्हारी इतनी हिम्मत “

वह ग़ुस्से से उनकी और लपका लेकिन गौतम बुद्ध बिल्कुल निश्चितं खड़े रहे । उन्होंने अपना हाथ आगे किया और बोले , आओ ! और मुस्कुराते रहे ।

बुद्ध के इतने आत्मविश्वास और करूणा देख वह ऐक दम पिघल गया और उसे अपने अस्तित्व का ऐहसास हो गया । बुद्ध ने उसे गले से लगा लिया और धम्म् की शिक्षा दी । वर्षों तक वह बुद्ध के साथ रहा फिर गौतम बुद्ध ने उसे धम्म् की शिक्षा का प्रसार करने के लिये भेज दिया जिससे वह भी दुखियों की सेवा कर सके और उन्हें भी धम्म् का मार्ग प्रशस्त कर सके । वर्षों बाद वह गॉव , शहर की ओर निकला लेकिन लोग क्रोध मे इतने अंधे थे कि वह अंगुलीमाल अपन नही सके और जब भी वह निकलता उस पर पत्थर फेंकते । अंगूलीमाल का सिर फूट जाता लेकिन वह मुस्कुराता रहता क्योंकि वह जानता था ये लोग सब दुखियन है बिल्कुल उसके जैसे है जैसे वह था , इसलिये वह उन्हें सह्रदय अपना लेता बिना किसी अपेक्षा के । लोगों ने उसे अब तक क्षमा नही किया था , गौतम बुद्ध जानते थे वह तैयार था इसलिये उन्होंने उसे वापस भेजा । फिर ऐक दिन किसी गर्भवती महिला की असहाय पीढ़ा को अंगूलीमाल ने अपने तेज़ से , ज्ञान से , करूणा से और धम्म् से ठीक कर दिया । यह बात पूरे शहर मे फैल गयी और लोगों ने अंगूलीमाल को अपनाना शुरू कर दिया ।

बाद मे अंगूलीमाल बेहद प्रसिद्ध बौद्ध हुये और उन्होंने सम्पूर्ण जीवन दुखियन की सेवा की और धम्म् का प्रसार किया ।

शिक्षा – प्रत्येक मनुष्य हजारो कमियाँ और ग़लतियाँ करता है लेकिन यह भी सत्य है कि प्रत्येक मनुष्य मे ऐक सुप्त अवस्था मे बोधी का भी निवास है । प्रत्येक मनुष्य ऐक बुद्ध है जिस दिन उसकी बोधी का उसे अहसास होता है । जब ऐक कुख्यात हत्यारा भी महान संत बन सकता है तो आप और हम तो अच्छे मानव बन ही सकते है । धम्म् के मार्ग पर चले और दुखियन की सेवा करे ।

Ps – All human beings are rolling into the misery just because of ignorance but their is a way out. Dhamma is the way to understand and experience your own being and real happiness. Everyone is a Buddha and everyone has Boddhi (knowledge) in dormant state. The moment you realise that Boddhi you start feeling compassion for all being and spreading positive vibration all around.

The moment you change your mentality , very next moment you start changing your state. Buddha said , ” All the Buddha before me , all the Buddha contemporary to me and all the Buddha to future , I pay my refuge upon them ”

Buddha is not a name , it is a state of one’s own realisation or ultimate truth . I can be a Buddha, you can be a Buddha and everyone can be a Buddha. Spread positivity and happiness and it will intensify your happiness ten times more back to you. Everyone can change their fate and come out of ignorance. Dhamma is a truth , Dhamma is a law of nature . Be a part of Dhamma and spread Dhamma to serve humanity.

धम्म् शरणम् गच्छामी

संघम शरणम् गच्छामी

बुद्धम् शरणम् गच्छामी ।

🧘‍♂️🧘‍♂️😇😇

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