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Motivation

इंक़लाब

कॉमनवेल्थ आया , टू जी आया

हर दिन आते छोटे वाले

त्रिण त्रिण टूटा कोयला देखा

और सबके देखे हाथ काले

तू कितना अभागा रे ‘भारत’

मिल गई आज़ादी मगर इंक़लाब जारी है

हो संसद पर हमला

हो मुम्बई पर हमला

तू हर दिन कायर बनता है

हालत तेरी आज देखकर

वो हर दिन हमला करता है

सैनिक हर दिन लड़ता है

हक़ दिन जान लुटाता है

तू मौन लिये बैठा है

तू हर दिन कायर बनता है

तू कितना अभागा रे भारत

मिल गई आज़ादी मगर इंक़लाब जारी है ।

त्राहि त्राहि , बिलखी जनता

ढूँढे न्याय , ढूँढे हक़ अपना

आज सिहर गया फिर से

देखकर बर्बाद घर मे

टूटी जैसे हर उम्मीद की किरण

हर राह , हर सफ़र मे

गुमनाम हो रहा , आज फिर तू

तू कितना अभागा रे भारत

मिल गई आज़ादी मगर इंक़लाब जारी है

नयी तरंगों सी , नयी उमंगों सी

आज ऐक आवाज़ देखी

ये इंक़लाब की आवाज़ें है

तू कब तक भागेगा ?

इस कुम्भी निन्द्रा से कब जागेगा ?

आज़ादी की तड़पन से

लहूलूहान जीवन से

संजोये क़तरा क़तरा , बूँद बूँद

वो इंक़लाब आया

इंक़लाब

वो इंक़लाब आया

तू कितना अभागा रे भारत

मिल गई आज़ादी मगर इंक़लाब जारी है ।

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Motivation

हैरान हूँ मैं

दोस्ती यारी और ज़िन्दगी के हिसाब मे

समझता नहीं हूँ फ़ायदे का सौदा

घाटों में घुट कर मुस्कराता खड़ा हूँ

आइने में खुद को देखकर हैरान हूँ मैं …….।।

छोटे छोटे क़िस्से , छोटी छोटी कहानियाँ

कब किताबों में ढल गयी पता ही नहीं चला

कितना आगे आ गया हूँ देखता हूँ कभी

तो सुकून के अहसास से हैरान हूँ मैं ……!!

ना शोहरत हासिल की , ना दौलत हासिल की

दो लफ्ज की तलाश में कुछ मोहब्बत हासिल की

बॉटता रहा ज़िन्दगी भर जिस उजाले की ताक़त

उसके खिले फूलों को खिलता देख हैरान हूँ मैं

कठिन वक़्त की डगर मे , जब भी लड़खड़ाया मैं

Dost Jindgi bhar 🌸

फिर से जिन्दा होने की वजह ढूँढ लाया मैं

लाखो ने कुछ कहा होगा , भुलाता गया मैं

जीने के इस अन्दाज़ से हैरान हूँ मैं …….!!!

दोस्ती यारी और ज़िन्दगी के हिसाब मे

समझता नही हूँ फ़ायदे का सौदा

घाटों मे घुट कर मुस्कराता खड़ा हूँ

आइने मे खुद को देख कर हैरान हूँ मैं …!!!

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हिसाब

जज़्बात की , फ़िदा की सबात मॉगता हूँ
ख्वाब के शिहाब का हिसाब मॉगता हूँ………!

वो फाजिल तेरी मोहब्बत का है , मेरे मौला
उसकी वफ़ा के इम्तहान का हिसाब मॉगता हूँ ……!

 

सरवत मोहब्बत , रहमत मॉगता हूँ
साक़ी इश्क़ का दीदार मॉगता हूँ……………!

ज़ख़्म की , सितम की , शिफ़ा मॉगता हूँ
दिलग्गी सुखान के जबाब मॉगता हूँ……….!

 

जज़्बात की , फ़िदा की सबात मॉगता हूँ
ख्वाब के शिहाब का हिसाब मॉगता हूँ…………!