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तिनके

ये कहानी कुछ अपने बारे मे लिख रहा हूँ । हॉलाकि यह कठिन है लेकिन यादों के झरोखों से तिनको को पिरोना और ताना बाना बुनकर उस हक़ीक़त को कहानी मे जिन्दा करना किसी भी रोमांच से कम नही । यह तुम्हारी स्मृति मे कहीं ना कहीं ताउम्र जिन्दा रहती है । इसलिये भी लिख रहा हूँ कि शायद इन परिस्थितियों मे लिखने से बेहतर अवसर हो ही नही सकता । कुछ और कारण भी है जैसे मेरे जीवन के बहुत पहलुओं से जो ना रूबरू हो सके , उन्हें भी अपनी उस कहानी तक पहुँचाना । जिससे न सिर्फ़ मे आने वाले वक़्त मे आपके ज़ेहन मे जिन्दा रहूँ बल्कि विचारों मे भी निरन्तर प्रवाहित होता रहूँ ।

मैं बचपन से ही जिझासु प्रवृति का व्यक्ति रहा हूँ । मेरे जीवन के उतार चढ़ाव किसी roller coasters (तीव्र गती से बहती लहरे) से कम नही रहे । स्कूल मे पढ़ाई मे बहुत अच्छा रहा लेकिन फिर कॉलेज आते ही नयी परिस्थितियों के अनुरूप ढल न सका और परिणाम स्वरूप B.Sc और Engineering Entrance मे फ़ेल हो गया । यह वास्तव मे झकझोर देने वाली घटना थी जिसने मुझे अन्दर से तोड़ दिया और आत्मग्लानि के अनुभव ने शायद निराशा के नये दामन को जन्म दिया । मेरे पिता जिन्होंने मुझे पढ़ाने के लिये ज़मीन तक बेच दी थी वह मुझसे कितनी उम्मीद करते थे यह बात मुझे अन्दर ही अन्दर खोखला कर रही थी । उस वक़्त शायद मुझे समझ नही थी की मैंटल हेल्थ क्या होती है लेकिन यह वास्तव मे nervous breakdown था लेकिन हम लोग ऐसे माहौल से आते है जहॉ इस बारे मे कोई बात नही की जाती । कितने ऐसे बच्चे है जो कठिन दौर से गुजरते है फिर हार मान जाते है । मुझे भी समझाने वाला कोई नही था और मैं किसी से भी अपनी भावनाऐं साझा नही कर सकता था । ऐक बार ऐसा लगा की कैसे लोगों का सामना किया जायेगा । यह सब कुछ ऐक अलग अनुभव था । जो कल तक समझते थे कि मैं अपने गॉव का सबसे होनहार लड़कों मे ऐक था वो लोग बातें बनाने लग गये थे कि मैं बर्बाद हो चुका हूँ ।

फिर गॉव वापस गया , घर परिवार का सामना करना किसी जंग से कम नही था । जब आप निराश होते हो तो आपको वास्तव मे चाहने वाले लोग भी दुखी होते है । यह इस प्रकार का जुड़ाव होता है जो सभी लोगों को प्रभावित करता है । सभी को मालूम था कि मैं निराश हूँ इसलिये मुझे किसी ने कुछ नही कहा लेकिन मुझे मालूम था कि सब कितने दुखी है । कई दफ़ा जीवन मे कुछ समझने और समझाने के लिये शब्दों की ज़रूरत नही होती । आपकी नम ऑंखें , आपकी शक्ल और सूरत सब ब्यॉ करती है ।फैल होना वास्तव मे बेहद निराशाजनक है । यह अनुभव जीवन के कटु अनुभवों मे से ऐक था ।

जुलाई 2007 की बात है मैं शाम के वक़्त छत पर बैठा था । मेरे पिता मेरे पास आये और उन्होंने कुछ ऐसे कहा कि जिसने मुझे हौसला दिया और मुझे वापस बदलाव की प्रेरणा दी

मेरे पिता बोले, “ बेटा ऐक बात समझनी चाहिये कि जैसे जैसे हमारी उम्र बड़ रही है हमारी काम करने की क्षमता कम हो रही है लेकिन जैसे जैसे तुम्हारी उम्र बढ़ रही है तुम्हारी काम करने की ताक़त बड़ रही है तो तुमको इतनी मेहनत करनी चाहिये की तुम्हें कभी असफलता का सामना ही न करना पड़े । बाकि हम बिल्कुल दुखी नही है यह सब तुम्हारे लिये ही तो है चाहे सारी ज़मीन बेचनी पड़ेगी लेकिन तुम लोगों की पढ़ाई मे कोई कमी नही होगी”

मैं वास्तव मे निःशब्द था , ऑखो मे ऑसू थे और हृदय मे आत्मग्लानि , लेकिन फिर उस रात सोया नही और पिता जी के शब्द ब शब्द डायरी मे लिख डाले । ऐक बात पहले से मैं समझता था कि आप जीवन मे अच्छा करेंगे तो भी समाज मे बहुत लोग आपको नापसन्द करेगें और अगर जीवन मे असफल रहोगे तो भी समाज मे काफ़ी लोग आपकी निन्दा करेंगे । इसलिये समाज मे लोगों के नज़रिये को उस उम्र मे छोड़ दिया था । मैं यह बात समझता था की जीवन मे Self motivated (आत्म प्रोत्साहन) और Ambitious (महत्वाकांक्षी) होना बेहद आवश्यक है । मैने निर्णय लिया कि अब साल भर घर नही आऊँगा । फिर देहरादून आ गया और पूरे ऐक साल तक घर नही गया । हमारा परिवार आर्थिक परिस्थितियों से जूझ रहा था यह वो समय था जिसे शायद शब्दों मे ब्यॉ करना मुश्किल है ।

यह सब मैं संजोये रखना चाहता हूँ इसलिये ताकि सनद रहे कि वक़्त की फ़ेहरिस्तों ने कई जमाने बदल डाले है ।बहुत से ऐसे युवा साथी भी होगे जो जीवन मे अभी कठिन दौर से गुजर रहे है लेकिन मैं आपको यक़ीन दिलाता हूँ यह सब कठिन दौर आपके जीवन के सबसे क़ीमती वक्त मे से ऐक होगा । इस दौर से जो से जो व्यक्तित्व निर्माण होगा वह शायद बेशक़ीमती है । मैं जीवन के उस दौर का ऐक वाक्या साझा कर रहा हूँ । यह वाक्या है आस्था का , मोहब्बत का , परिवार का और प्रेरणा का । कभी किसी के साथ साझा करने का अवसर नही मिला या ये कहूँ कोई इतना सौभाग्यशाली नही रहा शायद लेकिन यह आपको समर्पित करना चाहता हूँ ताकि जब तक ये ब्लॉग रहे तब तक यह कहानी मे जिन्दा रहे , हमेशा हमेशा के लिये ।

हमारी पढ़ाई मे जीतना योगदान हमारी दीदी का है उतना शायद किसी का भी नही है । उसने 1000 रूपये मे स्कूल मे नौकरी की है और हर महीने रूपया रूपया जोड़कर हमारी पढ़ाई को खर्चा भेजा । यह कल्पना भी करना मुश्किल है कि हम कैसा महसूस करते थे । बहुत कम ही लोग जानते है कि इस ख़ुशनुमा हृदय के अन्दर कितना मर्म दफ़्न है । मैं इसे अपने जीवन के बेशक़ीमती चीजो मे शुमार करता हूँ ।

देहरादून आने के बाद मैं , मेरा छोटा भाई ऐवम मेरा मित्र संजय हम साथ रहते थे । हम बहुत मेहनत करते थे और शायद यह वो साल था जब हमने हर दिन 8-10 घण्टे पढ़ाई की होगी । मेरे पास 2007 की डायरी लिखी है जिसमें मैं सोने से पहले रोज अपनी दिनचर्याओं का ब्योरा लिखता था । आज जब उसे खोलकर देखता हूँ तो वास्तव मे यक़ीन नही होता की हमने कितनी मेहनत की थी ।

Diary of 2007

इसके अलावा दीदी हर महीने लैटर लिखती थी जब भी किसी के पास पैसे भिजवाया करती तो साथ मे ऐक लैटर भी भेजती थी । यह बेहद पर्सनल है लेकिन मैं इसे अपने ब्लॉग मे साझा कर रहा हूँ ताकि जब भी मैं इसे देखूँ उन लम्हो को फिर से जी सकूँ । मेरे बाद भी सालो सालो तक यह कहानी जिन्दा रहे । ज़िन्दगी के उन पहलुओं को लिखना जिसे सिर्फ़ आपने जीया है वास्तव मे कठिन है । बहुत सी कहानियाँ होती है जो प्रेरणा देती है , जीने की उम्मीद देती है और सपने देखना सिखाती है । यह भी कुछ इस प्रकार से है जिसने उम्मीदों मे जीना सिखाया, आने वाले वक़्त के लिये प्रेरणा दी ।

सितम्बर 2007 मे दीदी का ऐक लैटर आया जिसमें लिखा था

“प्रिय भैय्या ललित

सदा खुश रहो । आशा करती हूँ कि तुम उस शुभ स्थान पर भगवान ऐवम् महासू देवता की कृपा से ठीक होगें । हम सब भी ठीक है । आगे समाचार इस प्रकार से है कि विक्की घर आ गया है और तुम्हारी चिट्टी भी मिल गयी है , मैने उसे पढ़ भी लिया है ।

भैय्या , चिट्टी भिजवाते रहना ।मुझे तो ऐसा लगता है कि हमारे पास कुछ भी नही है । मुझे मणी तो मिली थी लेकिन जब विक्की घर आया तो पापा और ने देखा कि उस डिब्बी मे तो कुछ भी नही था । जब मैं स्कूल से 3 बजे घर आयी तो विक्की को देखा तो ख़ुशी हुई लेकिन विक्की खुश नही था कह रहा था कि तुम झूठ बोल रहे हो तुम्हें कुछ नही मिला था ।

भैय्या कभी कभी तो मर जाने का मन करता है कि लगता है अब हम दुख नही झेल सकते , सारी ताक़त ख़त्म हो चुकी है । उस डिब्बी मे चॉदी के दो सिक्के भी थे जब देखा तो वो भी नही थे । भैय्या भगवान ने जो भी दिया था वह भी छीन लिया ।

पापा मम्मी और विक्की तुम्हें यह सच नही बताना चाह रहे थे लेकिन भैय्या मैं तुम्हें कभी भी झूठ नही बोलना चाहती हूँ । हमारे पास ख़ाली विश्वास बचा है ।

भैय्या मुझे स्कूल से 1000 रूपये मिले मैं तुम्हें ये रूपये भिजवा रही हूँ पापा के पास ऐक भी रूपया नही है । तुम्हें पता है कि मैं कमज़ोर हो रखी हूँ । भैय्या घर का खर्चा भी चलाना होता है । मेरी दवाईयॉ भी ख़त्म हो चुकी है । मैं जानती हूँ कि तुम्हें बहुत कष्ट हो रहा होगा क्योंकि बिना पैसो के कुछ भी नही होता लेकिन क्या करूँ 100 रूपये से जमा करती हूँ कभी 500 हो जाते कि तब तक कोई न कोई मुसीबत आ जाती है । दीपावली आने वाली है हमने कुछ भी नही ख़रीदा है । सोच रही थी की इस बार रंग करवा दूँ लेकिन मेरी इच्छा कभी भी पूरी नही होगी ।

भैय्या अपना भी ख्याल रखना हमारी टेंशन मत लेना । मैं तुम्हें विश्वास दिलाती हूँ अब जैसा तुम सोचोगे हम वैसा ही करके दिखायेंगे । अरे भगवान कब तक हमारी परीक्षा लेंगे अब हम भी परीक्षा देने के लिये खड़े । मैं सनम की भूगोल की किताब , इतिहास उत्तरांचल की किताबे पढ़ रही हूँ । भैय्या तुम्हारे पास जितना भी समय है ख़ूब पढ़ाई करना और मुझे भी चिट्टी भिजवाते रहना थोडा हौसला बजता है । जब बहुत दुख होता है तो तुम्हारी चिट्टी पढ़ लेती हूँ ।

सनम के अर्धवार्षिक परीक्षा समाप्त हो गयी है रिज़ल्ट के बाद पता चलेगा कि इसने कितनी मेहनत की है । ख़ूब पढ़ाई करती है काम भी करती है । मम्मी सुबह घास के लिये जाती है उसके बाद कुछ काम नही करती है । मैं और सनम सारा काम करते है ।

महासू देवता तुम्हारी रक्षा करेंगे । विश्वास रखना ।

भैय्या चिट्टी भिजवाना हम इन्तज़ार करेंगे ।

…………..signature.

आज भी जब ये चिट्ठीया खोलता हूँ तो ऑंखें नम हो जाती है । कभी किसी के साथ साझा करने का अवसर नही मिला । मेरे लिये यह उस क़ीमती उपहार से कम नही है जिसने मुझे भावनात्मक रूप से संवेदनशील बनाया है । आपके साथ साझा कर रहा हूँ क्योंकि ये सिर्फ़ कहानी नही है यह उससे बढ़कर है । ये ज़िन्दगी है जिसे मैने जीया है और ये वक़्त है जिसने हमे सिखाया है । हमारी नींवों मज़बूत बनाया की कभी किसी के प्रति घृणा , द्वेष या ईर्ष्या उत्पन्न न हो । मैं शुक्रगुज़ार हूँ हर उन छोटी छोटी बातो का जिसने जीवन को अलग रूप दिया । जीवन मे बहुत से ऐसे पहलुओं से रूबरू होना मेरी ख़ुशनसीबी है और मैं तमाम उन व्यक्तियों से ज़्यादा भाग्यशाली हूँ जिन्होंने जीवन मे कठिन दौर का सामना नही किया है । हम कितने संवेदनशील हो जाते है कि हमारे संवाद हमारी लेखनी से स्थापित होते है । ये वो दौर था जब मैं न सिर्फ़ भावनात्मक रूप से बल्कि वैचारिक रूप से भी ईश्वर के क़रीब जाना चाहता था । मैने उस वक़्त के दौर मे कुछ कविताएँ लिखी है जो मेरी प्रगाढ़ आस्था को प्रदर्शित करती है ।जब हम भयभीत होते है तो हमे भावनात्मक संवेदनशीलता को स्थिर बनाये रखने के लिये सहारे की आवश्यकता होती है । हमारे पास ऐसा कुछ भी नही था जो हमारी मज़बूती बनता सिवाय उम्मीदों के । मैने प्रार्थनाएँ की , मैने तपस्याएँ की और भक्ति की ।

उस दौर मे मुझे लगता था कि मुझसे बड़ा भक्त शायद ही इस ब्रह्माण्ड मे कोई होगा । मैने ईश्वर के साथ संवाद स्थापित किये । मैने हज़ारों प्रार्थनाऐं की और मैने कविताएँ लिखी । ये मेरे लिये क़ीमती वक़्त था मैने उस दौर मे ऐक वैचारिक संवेदना स्थापित की जिसने ज़ेहन मे हमेशा के लिये गहरा प्रभाव डाला । उस दौर की यह कविता मेरी बेहतरीन कविताओं मे से ऐक है । यह कुछ इस प्रकार से से है ।

मालिक (A letter to God by Lalit Hinrek )

तू मालिक है मेरे मौला , इस बन्दे पे रहम कर

ना समझू कि तू काफ़िरों की हुकूमत से डर गया

वो बन्दा जो आवाज़ दे , उस बन्दे पे रहम कर

ना समझू की तू काफ़िरों की हुकूमत से डर गया

अर्ज क्या करूँ कि क्या ख्याल है !

आज तक़दीर लिख दे कुछ ब्यॉ न करूँ

तू मालिक है मेरे मौला , इस बन्दे पे रहम कर

वो बन्दा !

वो बन्दा जो इस अंधेरे से डर गया

वो बन्दा !

वो बन्दा जो तेरी मोहब्बत पे लुट गया

राह देख तेरी वक़्त जाया कर गया ….वो बन्दा

उस बन्दे पे रहम कर ।

तू मालिक है मेरे मौला , इस बन्दे पे रहम कर ।

ना समझु की तू काफ़िरों की हुकूमत से डर गया ।

ना जाये इतना दूर कि तू तन्हा हो जाये

उस बन्दे की मोहब्बत को नज़रअंदाज़ न कर ।

वो बन्दा तेरा अपना है , कुछ ख्याल तो कर

यूँ काफ़िरों की हुकूमत को आबाद न कर

तू मालिक है मेरे मौला ।

अर्ज क्या करूँ कि तू क़रीब हो जाये

मिट जाये ये फ़ासले , तू नसीब हो जाये

आज तक़दीर लिख दे कुछ ब्यॉ न करूँ

तू मालिक है मेरे मौला , इस बन्दे पे रहम कर

तू मालिक है मेरे मौला , उस बन्दे पे रहम कर

ना समझु की तू काफ़िरों की हुकूमत से डर गया ।

दे हवा नम ऑखो को सुखाने मे

नफ़रत को , जलन को बुझाने मे

कर गया जो ग़लतियाँ अनजाने मे

ना दूर इतना जा मेरे मौला

कि लग जाये वक़्त लम्हा भुलाने मे

तू मालिक है मेरे मौला , इस बन्दे पे रहम कर

अर्ज क्या करूँ की तू परवाह न करे

हो गया तन्हा तो तेरा दर नज़र आया

ये मोहब्बत है मेरी , मुश्किल न समझ

यहॉ लुट गये हज़ारों तो तेरा दर नज़र आया

आज तक़दीर लिख दे , कुछ ब्यॉ न करूँ

तू मालिक है मेरे मौला , इस बन्दे पे रहम कर

ना ग़ुरूर है कोई वो बेज़ुबान है

ना शिकवा कोई वो वीरान है

ये कैसी वफ़ा का इम्तिहान है

वो बन्दा है तेरा इशारा तो कर

वो भड़के वो शाला , वो तूफ़ान है

तू मालिक है मेरे मौला , इस बन्दे पे रहम कर

ना समझू की तू काफ़िरों की हुकूमत से डर गया !!

यह प्रगाढ़ आस्था परिस्थिति जनित होती है । मुझे यह बात समझ आ गयी की यदि ईश्वर कही भी होते तो मनुष्य जीवन मे कभी दुख नही होते । मेरी हज़ारों प्रार्थनाऐं शायद अनसुनी रह गयी । धीरे धीरे यह समझ आ गया कि कर्म सर्वोच्च है । फिर कर्म को अराध्य मानता चला गया और फिर वास्तविकता को समझने की कोशिश करता रहा । यह ऐक अलग विषय है इस पर कभी फिर चर्चा करूँगा ।

लिख बहुत कुछ सकता हूँ लेकिन फिर कभी किसी और कहानी के रूप मे कुछ बाते लिखूँगा ।वो वक़्त भी चला गया और उस साल हम तीनो रूम मेट सफल होकर अपनी अपनी मंज़िलों के लिये आगे बड़ गये ।

हमारा रूम मेट संजय दिल्ली पुलिस मे दारोग़ा (Sub Inspector) भर्ती हो गया । मैं इंजीनियरिंग कॉलेज चला गया हॉलाकि जिस प्रकार से मेहनत की थी उसका 10 % भी सफल नही हो पाया । मेरा छाँटा भाई सिविल इंजीनियरिंग का डिप्लोमा करने श्रीनगर चला गया ।

आई० ऐ० ऐस० बनना चाहता था सोचा था कभी बनूँगा तो उस वक़्त की लिखी डायरी और उसमे लिखी उस दौर की बातें ऐक किताब के रूप मे लिखूँगा । लेकिन हम वक़्त की नज़ाकत को नही समझ पाते । वक्त फिर हमे उन दिशाओं मे ले जाता है जिसकी हमने कभी कल्पना भी नही की होती है । ये ऐक छोटी सी घटना है लेकिन कितनी तमाम ऐसी घटानाओ ने मेरे जीवन को पिरोया है ।

जब भी कभी लगता है कि आगे आ गया हूँ तो पीछे मुड़कर देखता हूँ , बार बार पड़ता हूँ और लिखता हूँ । जब भी लगता है कि हृदय मे नफ़रत भर रही है , पीछे मुड़कर देखता हूँ तो मुझे बस मोहब्बत ही मोहब्बत दिखाई देती है । यह मेरे हृदय की सबसे कोमल पहलुओं मे से कुछ है जिसे आज आपके सामने समर्पित कर रहा हूँ । यक़ीन मानिये यह मेरी तरफ़ से दिया गया ऐक तोहफ़ा है जिससे आपके हृदय की भावनात्मक संवेदनाओं को जिन्दा करने का अवसर मिलेगा । मैं नही जानता आप कौन हो , क्या हो और कहॉ हो लेकिन यक़ीन मानिये यदि आप यह पढ़ रहे हो तो आप जो भी हो , जहॉ भी हो , मेरा हृदय आपसे बेइंतहा मोहब्बत करता है और हमेशा करता रहेगा ।

आप सभी को समर्पित

“फिर मिट जायेगी ऐक दिन हस्ती हमारी

पर याद तो करोगे मेरी क़लम की वफ़ा को

टुकड़े मत समझियेगा, मेरे दिल की आवाज़ें है

शिद्दत से सुनोगे तो समझोगे कभी”

~thelostmonk

One reply on “तिनके”

आपको मोहब्बतें दोस्त

एक काम कर सको मेरा तो जरूर कर देना

दीदी के खतों को मेरी तरफ से एक बार चूमना ज़रूर और दीदी को मेरी तरफ से नमस्ते और प्यार कहना
मुझे यकीन है कि आपके पास इन खतों से क़ीमती कोई भी वस्तु नहीं होगी और तमाम उम्र शायद इससे क़ीमती वस्तु ना कमा पाओ
आपकी कहानी कई लोगों को हौसला देगी, लिखते रहिए अपने अनुभव बाँटते रहिए

आपसे मुलाकात ज़रूर होगी कभी

शिवम डोभाल ‘बेढंगी’
पुरटाड

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