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फ़िज़ा

फ़िज़ा

अब ना दूर जाऊँ इन रंगीन फ़िज़ाओं से

महकती हुई खुशबुओं की जैसे हवाओं से

जो ये बात कह रही है कहानियाँ

जी लिया हूँ जैसे हर उम्र , इनकी अदाओं से

ताउम्र जो क़ैद हुऐ ज़ंजीरों मे

आज तो उनकी भी जैसे

जश्न ऐ आज़ादी चला आया है

अब ना दूर जाऊँ इन रंगीन फ़िज़ाओं से

फ़िज़ा 🌸💫

नशा ये रूह का है , हुस्न की बात कहॉ है

ईश्क के दीदार का है , चॉद की बात कहॉ है

डूब जाऊँ अब कहीं भी , शौक़ मँझधार का है

राख हो जाऊँ या ख़ाक हो जाऊँ

नशा तेरे प्यार का है …….!!

अब ना दूर जाऊँ इन रंगीन फ़िज़ाओं से

महकती हुई खुशबुओं की जैसे हवाओं से

जो ये बात कह रही है कहॉनियॉ

जी लिया हूँ जैसे हर उम्र इनकी अदाओं से …।

ताउम्र जो क़ैद हुऐ ज़ंजीरों में

आज तो उनका भी जैसे

जश्न ऐ आज़ादी चला आया है

अब ना दूर जाऊँ इन रंगीन फ़िज़ाओं से

महकती हुई ख़ुश्बूओं की जैसे हवाओं से …..।।!!

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https://youtu.be/2ijeINrruC0

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अनकही ………Lalit Hinrek

अनकही

जो उकेरती थी ज़ेहन के ख़्वाबों को ,

वो तख्ती वो स्याही कहीं गुम हो गयी ।

जो बुनते थे आवारा परिन्दों के सपने ,

आवारगी 🌸💫

वो मिट्टी , वो बर्तन कहीं खो से गये ।

उन सपने से ख़ुद को हँसाने की चाहत ,

हिसाबों की उलझन में कहीं खो सी गयी ।

जो उकेरती थी ज़ेहन के ख़्वाबों को ,

वो तख्ती वो स्याही कहीं गुम हो गयी ।

कहानियों में देखी वो सच्ची मोहब्बत ,

किताबों के पन्नों से गुम हो गयी ।

वो दोस्ती , वो यारी , वो रिश्तों की रौनक़ ,

दूरियों मजबूरियो से धुमिल हो गयी।

जो उकेरती थी ज़ेहन के ख़्वाबों को ,

वो तख्ती, वो स्याही कहीं गुम हो गयी !

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घाटी के वासी …………Lalit Hinrek

ओ घाटी के वासी ,

यहॉ नदियॉ बहती है , कोयल गाती है

हवाऐं स्वच्छ प्राणवायु लाती है

रंगीन ऑसमा है , रवि की किरणें ऊर्जा देती है

किन्तु ,

यह मानवता कि दुर्बलता है कि वह मजबूर हुआ है ,

समझा ना प्रकृति को उसने व सुख से दूर हुआ है ।

फिर छोड़ दिया नदि नालों को ,

गॉव और तालाबों को

और पहुँच गया फिर शहरों तक ,

खोजता वह भोजन को ।

यहॉ भागदौड़ जीवनशैली को भरपूर जीया उसने ,

पॉचसितारा रौनक मे भी फीकापन महसूस किया उसने ।

मानवता , हमदर्दी को यहॉ सिमटते देखा है ,

मतलब व चालबाजी को यहॉ साथ लिपटते देखा है ।

वाहनों की धूं धूं ने प्राणवायु को विरल किया ,

बिल्डिंग के जालो ने पेड़ो से महरूम किया ।

ना रवि कि किरणे , ना स्वच्छ गगन

कभी विकराल धुंध , कभी धुंऑ धुऑ ।

किन्तु ,

ओ घाटी के वासी ,

Tons valley

यहॉ तो नदियॉ बहती है , कोयल गाती है ,

हवाऐं स्वच्छ प्राणवायु लाती है ,

रंगीन ऑसमा है , रवि की किरऩे ऊर्जा देती है ।

ओ घाटी के वासी ,

यहॉ नदियॉ बहती है ,कोयल गाती है ।

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अभिलाषा

मेरी कहानियों में डूबा हुआ

बस बेसुध सा होना चाहता हूँ ।

छू ले जो दिल के ज़ख़्मों को

कोई वो शायर होना चाहता हूँ ।

ईश्क में इस क़दर खोना चाहता हूँ

कि जैसे बस रोना चाहता हूँ ।

मिलती नहीं मंज़िल तो क्या हुआ !

राही हूँ , बस दीवाना होना चाहता हूँ ।

💫🌸💫

कोई तो आरज़ू करे मेरे भी मुखौटे को जीने की ,

कोई ऐसा किरदार होना चाहता हूँ ।

मेरे काम को याद कर ले मेरे आने वाले ,

कोई ऐसा गुमनाम होना चाहता हूँ ।

मेरी कहानियों में डूबा हुआ

बस बेसुध सा होना चाहता हूँ ।

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आज

ना रूक कही तू चलता जा

ना रूक कही तू चलता जा

जैसे सूरज की रौशनी

जैसे कल कल बहता पानी

भड़के तूफ़ानों को घेरा

जैसे वन मे जलती ज्वाला

ना रूक कही तू चलता जा ।

उड़ते पंछी को देख कहीं

जो जी लेता जी भर के आज

कहता फिरता , तू कर लेना जो करना है

जी लिया जी भर के आज ।

ना रूक कही तू चलता जा

ना रूक कही तू चलता जा

कितना सच बिखरा है आज

जो सामने है अनमोल है

मिट्टी तो मिट्टी मे मिलती है

कर्मों का सुख हो या सुन्दरता का आकर्षण

ना रूक कही तू चलता जा

यहॉ आज ही बस है जीवन ।

ना रूक कही तू चलता जा

ना रूक कही तू चलता जा ।