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आवाज़

तुम साथ दो मैं बुलन्द आवाज़ हूँ

तुम वक़्त दो मैं हसीन ख्वाब हूँ

कह गये जो अनसुनी कहानियाँ

मैं उस चॉदनी रात की ही कोई बात हूँ

रूह से जिस्म हो रहा निलाम हर गली में

वो कह गया साहिब कि “मैं सरकार हूँ”

नोच कर लोथड़े खाने वाले “साहिबज़ादे”

और मैं वो गरीब गिरा हुआ “शिकार हूँ”

वो मुर्दाखोरो की फ़ौज के मसीहा

अभयं सत्त्वसंशुद्धिः ज्ञानयोगव्यवस्थितिः 💫

तू ही शहंशाह, तू ही परवर्दीगार

लेकिन वक़्त की फ़ेहरिस्त समझ

कि मैं हक़ीक़त हूँ , कि मैं इंकलाब हूँ

और मैं बुलन्द आवाज़ हूँ

आज ये सहर है , कल सवेरा होगा

आज का मूक हूँ और कल की आवाज़ हूँ

कि मैं हक़ीक़त हूँ , कि मैं इंकलाब हूँ

और मैं बुलन्द आवाज़ हूँ …..!!!

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तबियत ख़राब है

जहॉ भक्ति के प्रेम में मुखौटों का हिजाब है

वहॉ तबियत ख़राब है

जहॉ आज़ादी का दिखावा है और सोच ही गुलाम है

वहॉ तबियत ख़राब है

इंसानो से ज़्यादा जहॉ मंदिरों से प्यार है

वहॉ तबियत ख़राब है

जहॉ पण्डे पुजारी या मौलवी आबाद है

वहॉ तबियत ख़राब है

किताबों से ज़्यादा जहॉ धर्म का स्थान है

वहॉ तबियत ख़राब है

जहॉ लहू के रंग में जहॉ जाति का वास है

वहॉ तबियत ख़राब है

जहॉ समाज में तरक़्क़ी की व्याख्या निराधार है

वहॉ तबियत ख़राब है

जहॉ देवता भी अनिष्ठा के लिये ज़िम्मेदार है

वहॉ तबियत ख़राब है

जहॉ कर्म के स्वरूप का खोखला निर्माण है

वहॉ तबियत ख़राब है

जहॉ खोखली आवाज़ में बुलन्द इंकलाब है

वहॉ तबियत ख़राब है

जहॉ प्रगतिशील खोलों में रूढ़िवादी खाल है

वहॉ तबियत ख़राब है

जहॉ भक्ति रूपी पढ़ा लिखा अंधविश्वास है

वहॉ तबियत ख़राब है

जहॉ भक्ति के भाव में भय का प्रहार है

वहॉ तबियत ख़राब है

समतामय प्रेम हो , निश्चल विश्वास हो

भक्ति का स्वरूप हो या कर्म का स्वरूप हो

हृदय करूणामय हो , भाव नि:स्वार्थ हो

सोच प्रगतिशील हो , प्रयोगात्मक का ज्ञान हो

धर्म सिर्फ़ कर्म हो , प्राथमिकता इंसान हो

अंधविश्वास विनाश हो , साक्षर समाज हो

रूढ़िवादी नष्ट हो , अंधभक्ति नष्ट हो

तबियत सुधार हो , जनकल्याण हो 💫💫💫

PS- Dedicated to those so called educated people who wants to bring the change in society and are afraid to raise their voices against orthodoxies.

Regards

The Lost Monk

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भक्ति,प्रेम और मंदिर

Whole life Budhha said there is no God , when he died people made him God

तो शुरू इस प्रकार करता हूँ ! मेरे गॉव मे मंदिर निर्माण के लिये चंदा इकट्ठा किया जा रहा है । पिछली दफ़ा भी किया गया जिसमें शायद इक्कीस लाख रूपये ऐकत्रित हुऐ । ऐक समीती का निर्माण हुआ और पुराने मंदिर को तोड़ दिया गया । तोड़ने से पहले शायद ऐसेटीमेट नहीं बनाया गया कि नये मंदिर की लागत कितनी होगी । ना शायद कोई ऐक्शन प्लान बनाया गया । फिर कार्य प्रारम्भ हुआ और कार्य चल पड़ा लेकिन इक्कीस लाख खर्च हो गये और मंदिर की चारदीवारी भी नहीं बन पायी । कुछ लोगों का आरोप है कि पैसों का दुरूपयोग हुआ और फिर पुरानी समीती को भंग कर दिया गया और फिर नयी समीती का गठन हो गया । अब फिर से चंदा उगाही का कार्य किया जा रहा है क्योंकि निर्माण अधूरा है लेकिन अभी भी कोई ऐसेटीमेटेड वेल्यू नहीं प्लान की गई कि कितना खर्च और आयेगा ना कोई ऐक्शन प्लान है । मैं इस बात पर नहीं जाता हूँ क्योंकि यह मेरा विषय नहीं है । मेरा विषय तो आस्था है जो की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर निर्भर करती है । मैं किसी भी व्यक्ति को नहीं कहता हूँ कि वह पूजा करें या भक्ति करे क्योंकि यह उसका बेहद ही व्यक्तिगत विषय है जिसका मैं सम्मान करता हूँ । मैं अपने विचारों को यहॉ लिख रहा हूँ जो सदियों तक यहॉ रहेंगे । मेरे आने वाली पीढ़ी इस बात की गवाही देगी की मैंने कभी भी बुलन्द आवाज़ को चापलूसी के दामन में नहीं लिपटने दिया और जिज्ञासा भरे हृदय में विद्रोह की सारी संभावनाओं की हमेशा जिन्दा रखा ।

स्कूल के दिनों में कबीर को पढ़ा तो कबीर से मोहब्बत हो गई , ऐसा समझता था कि यह व्यक्ति कितना यथार्थवादी है , उनकी कुछ पंक्तियाँ लिख रहा हूँ

“कॉकर पाथर जौरी के, मस्जिद लिये बनाय

ता चडी मुल्ला बॉक दे , क्या बहरा हुआ खुदाय

पाहन पूजे हरी मिले , तो मैं पूजूँ पहाड़

ताँते ये चाकि भली , पीस खाय संसार”

यह सबने पढ़ा होगा लेकिन प्रभु , मैं इस बात से आश्चर्यचकित हूँ और प्रश्नों के भंवरलाल में डूबा हुआ हूँ कि कैसे समाज पढ़ लिख कर भी आवाज़ नहीं उठा सकता और दोहरे चरित्र में डूबा रहता है जहॉ ऐक और आडम्बर और रूढ़िवादीता का समर्थन और दूसरी और विकासशील प्रगतिशील सोच का समर्थन और मैं इस बात से भी वाक़िफ़ हूँ कि यदि मैंने इनकी धारा के विपरीत चलने का प्रयत्न किया तो मुझे “लाल सलाम” या “सेल्फ़ सेन्टर्ड” जैसे शब्दों से नवाज़ा जायेगा और यदि मैं ज़्यादा कुछ कहूँ तो मुझे हो सकता है कि “मानसिक विकलांगता” की उपाधि तक दी जायेगी लेकिन प्रभु ! मैं आवरण के मुखौटों में नहीं जीना चाहता हूँ और अपनी भावनाओं को कतरा कतरा महसूस करना चाहता हूँ तब तक , जब तक मैं स्वयं को जिन्दा महसूस कर सकू । मैं प्रेम को जीना चाहता हूँ , भक्ति को महसूस करना चाहता हूँ, मैं तो भटका हुआ ऐक जिज्ञासु हूँ बस लीन होकर यूँ ही कहीं खोना चाहता हूँ , लेकिन उससे पहले ऐक संवाद स्थापित करना चाहता हूँ ।

प्रभु मेरे प्रश्न है कि आज लाख लोग इस बात से नहीं प्रेम करते कि वास्तव में उनके हृदय में भक्ति या प्रेम है बल्कि इस बात से करते हैं कि उनमें भय है । मैंने भगवत गीता पढ़ी है जिसमें आपने लिखा है कि “अभयंसत्वसशुद्दि” जिसका मतलब है कि भय से दूर रहो । यदि प्रेम होता तो वह सर्वप्रथम अपने सबसे करीबी लोगों को धोखा नहीं देते । चाहे मित्र हो या परिवार सब निश्छल प्रेम के लायक़ है । प्रेम और भक्ति का खोखलापन अगर बिसरा पड़ा है खोलों में आपकी चरणबन्दना है तो प्रेम और भक्ति की गहराई समझना बेहद मुश्किल है । प्रभु ! आप तो सर्वश्रेष्ठ है , सर्वव्यापी है और आप स्वयं कहते हैं कि प्रेम तो समरस है , सरल है ,अटूट है और अविभाजित है ।

Be free from fear ………Bhagwat Geeta

प्रभु ! ग़रीबी में पला बड़ा हूँ , 2006-07 की डायरी उठाता हूँ तो ऐसा कोई सा दिन नहीं होगा जिस दिन आपसे संवाद स्थापित नहीं किया है । अब जिज्ञासु हूँ , सवाल उठाना मेरा कर्म है । मैं उस बात को मानता हूँ जिस बात को महसूस कर सकता हूँ और जी सकता हूँ । प्रभु ! मेरा प्रश्न है कि मेरा बडा सा परिवार है जिसमें सभी परिवार के सदस्यों ने तरक़्क़ी की है । आज मेरे 3 चाचा देश की फ़ौज में है , ऐक चाचा FCI में है , मेरा भाई इंजीनीयर है लेकिन हमारे परिवार की तीसरी पीढ़ी के बच्चे ऐक दूसरे को नहीं जानते है यह बिड्मबना है क्योंकि आपके नाम पर ढोंग ढकोसलों और भय से उत्पन्न कारोबार करने वाले आपके पण्डे पुजारियों ने ये कहा है कि हम लोग ऐक दूसरे से बात नहीं कर सकते हैं और न ही छू सकते है , घर जा सकते हैं । प्रभु क्या यह प्रेम है ? मैं ये नहीं कहता कि मैंने विज्ञान ज्यादा पढ़ ली है , मैं ये भी नहीं कहता कि मैंने ज़्यादा पढ़ाई कर ली । यह मैंने जीया है और मेरा हक़ है कि मैं आपके अस्तित्व पर सवाल उठाऊँ क्योंकि मैं भी तो आपका बालक हूँ ! क्या यह उचित है कि ऐक ही परिवार के सदस्य बिखर जाये और उनके आने वाली पीढ़ी ऐक दूसरो को पहचानें तक नहीं । यदि यह भक्ति है और यह ईश्वर है तो मैं आडम्बर के सभी स्त्रोतों का खण्डन करता हूँ ।

प्रश्न करना नास्तिकता नहीं है , जिज्ञासा मानसिक विकलांगता नहीं है , यह यथार्थ को स्वीकारना है । मैं इस छोटे से जीवन को आडम्बर में नहीं जीना चाहता ना मुझे किसी की किसी बात से फ़र्क़ पड़ता है कि कौन मेरे बारे में क्या राय रखता है । मैं गौतम बुद्ध के जीवन से बेहद प्रभावित हूँ । ज्ञान कि प्राप्ति के बाद ताउम्र उन्होंने यह बताया कि ईश्वर नहीं है और उनके मरने के बाद उनको ही ईश्वर बना दिया गया । भगवद्गीता में कृष्ण स्वयं कहते हैं कि “मैं सर्वव्यापी हूँ , कण कण में समाया हूँ” तो दिखावे की आवश्यकता क्यों ? मैंने बहुत से लोग देखे हैं जो श्रद्धा सबूरी सबका मालिक एक कहने वाले फ़क़ीर साईं बाबा को भगवान मानते हैं लेकिन जिस व्यक्ति ने जीवन भर चप्पल तक नहीं पहनी आज उनका ताज ही हीरो से जड़ा है , क्या ज़रूरत पड़ गयी , उन्होंने तो जीवन भर सम्पत्ति अर्जित नहीं की ।

प्रभु ! मुझे नहीं पता कि बीते समय में क्या हुआ और कैसे हुआ । लेकिन आज से चालिस साल पूर्व दिवाली के दिन मेरे ही परिवार के दादा जी की मेरे ही गॉव के ही कुछ ब्राह्मणों और अन्य परिवार के राजपूतों द्वारा हत्या कर दी गयी । उसके बाद राजपूतों और ब्राह्मणों में रंजिश स्थापित हो गई । क़ानूनी कार्यवाही हुई और साथ में देवताओं के फ़ैसले भी लिये गये । फ़ैसलों में यह तय हुआ की राजपूत और ब्राह्मण के आपस में छूत लग गई और जो राजपूत परिवार हत्या में शामिल था उस परिवार पर भी छूत लग गई जिससे राजपूत अब ब्राह्मणों के घर नहीं जाते है ना खाते है ना उठते बैठते है और वह राजपूत परिवार भी समस्त राजपूत परिवार से अलग थलग है । अब चालिस साल से ज़्यादा वक्त हो गया गॉव मे तब से दिवाली नही होती है ना उसके बाद की पीढ़ी ऐक दूसरो को जानती है । हमारी पीढ़ी की क्या गलती है और किस बात की सजा उनको दी जा रही है । कुछ लोगों की गलती से पूरी पीढीयो को सजा दी गई और अभी तक दी जा रही है लेकिन भय इतना है कि कोई इस बारे में आवाज़ नहीं उठाता क्योंकि यही वो भय है प्रभु ! जिसकी मैं बात कर रहा हूँ । ये आडम्बरी , प्रेम नहीं करते है बल्कि भय से ग्रसित हैं । अगर न्याय की ये ही व्याख्या है प्रभु ! तो मेरा सवाल लाज़मी है । आपका भव्य मंदिर बने लेकिन पहले ढोंग ढकोसलों से ग्रसित सोच से नहीं बल्कि उस आधार पर जहॉ समरसतावादी हो जहॉ वास्तविक प्रेम हो ।

प्रभु ! मैं जानता हूँ कि मैं धारा के विपरीत आवाज़ उठाकर अपने लिये बुराई अर्जित कर रहा हूँ लेकिन मैं चाहता हूँ कि जब तक जीऊँ तब तक बुलन्द सोच और आवाज़ के साथ जीऊँ और इस बात पर नहीं की मुझे समाज में दिखावे के लिये चापलूसी करनी है या कोई ढोंग करना है । जिस मंदिर की नींव में प्रेम ही नही , भक्ति ही नहीं और ईमानदारी ही नहीं वहॉ देवता निवास कैसे कर सकते है ।प्रभु ! आप सर्वश्रेष्ठ है , सर्वव्यापी है सबके हृदय को रक्त से लेकर मानसिक स्तर तक जानते है तो इतनी व्यापक व्याख्या करने की आवश्यकता नहीं है ।

मैं यह इसलिये लिख रहा हूँ ताकि सनद रहे और भक्ति के वास्तविक स्वरूप को समझा जाये । आज ईश्वर के नाम पर लोग ठगी करते है , भय के नाम पर व्यापार करते है और राजनीती करते है । मंदिर तो बन जायेगा लेकिन प्रेम नहीं बना पाओगे , भक्ति नहीं ला पाओगे और ईश्वर भी नहीं ला पाओगे । आज स्वतंत्र रूप से ऐक विषाणु जो सबसे छोटी कोशिकाओं से भी छोटा है , वह सम्पूर्ण विश्व के परिदृश्य को बदल देता है । मैं ये नहीं कहता आप अपनी आस्थाओं को बदलिये बल्कि ये कहता हूँ जिस चीज़ से आपको सुकून मिलता है वह करिये । जिस चीज़ से आप ऐक बेहतर इंसान बनते हैं आप वह करिये यदि यह मंदिर है को दिल से भक्ति में लीन रहिये । बस आप ऐक आडम्बर रहित व्यक्ति बनिये जिसमें इतना तो सामर्थ्य हो की वह दोहरे चरित्र में न जीये चाहे वह स्वयं के लिये हो या परिवार के लिये या समाज के लिये या मित्रता के लिये हो ।

ऐसा नहीं है मुझमें सामर्थ्य नहीं है जिस दिन मन होगा सब कुछ न्योछावर कर सकता हूँ लेकिन तब तक कुछ सवालों के जबाब नहीं मिल जाते तब तक जिज्ञासु बनना ही बेहतर है । क्योंकि यह जानना दिलचस्प है कि

“ख़ुदा भी बेबस है , अमीरी की हिरासत में

उसके प्यादे ख़िलाफ़त में है

अपनों की इस अदालत में

सजा ऐ मौत दी , मगर संभाले रखा

निभाना किसी रिश्ते को फिर जाना हमने”

ईश्वर तो पता नहीं है या नहीं लेकिन हमने जो ईश्वर के नाम पर हमने खोया है उसकी भरपाई शायद ही पीढ़ियों तक हो पायेगी चाहे वह परिवार का प्रेम हो या फिर समाज में मेल मिलाप हो । मेरी बुराई कीजिये मुझे आपत्ति नहीं है । बस थोड़ा यथार्थवादी बनिये और प्रेम के वास्तविक स्वरूप को समझिये । यह समरस है , यथार्थ है , सरल है और अटूट है ।

Disclaimer- I do not spread any kind of negativity, this is my personal opinion and I don’t influence anyone to follow my ideology. I don’t restrict anyone to follow theirs as well. Faith is something very personal and I request you that this is individual freedom and let it be , Please. May this universe brings you happiness and strength. 💫💫🌸🌸

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How to invest your time ?

Hello Guys!

Time is a valuable thing. If you do not understand your craft your effort will become waste. You have so much of energy and potential in you. Biggest problem is that you don’t understand where to invest energy and time. I will be talking about opportunities and scopes in different areas where you can put your effort and inspire many others to chose a different prospective and choices in life.

you need to understand one thing that सबकी सरकारी नौकरी नहीं लग सकती ! and it is foolish to waste our time in such area where it is not our cup of a tea. Let us discuss some innovative ideas and find out something interesting which can be easier than anything. Guys ! I’m sharing some of my personal experiences with you and trying my level best to motivate you  in a way that you can think differently. Let us find together some unique ways where we can invest our time and bring out the best in us. you can watch my video here how to invest your timeI ? Lalit Hinrek

You can focus on such areas like

  1. Blogging 
  2. YouTube
  3. Online E commerce 
  4. Photography
  5. Makeover & stying
  6. Cuisines and food items
  7. Tourism , Traveling and adventures (Home stays at mountains)
  1. Blogging –  You can make money easily through online blogging and writing if you are good at it. There is a lot of opportunities in this. You can write about anything but it should be like by audience so that you can easily get traffic. More people visit your blog more you have opportunity to earn money. I have already mentioned that I started blogging as a hobby and now My blog is eligible for running ads. This is really a very interesting field and I will upload a video on how to start a blog ? In future. These are some best blogging sites where you can easily create your blog without spending a penny.  i).    wordpress           ii) wix           iii)      joomla iv) Medium    v)ghost.org
  2. YouTube – Who don’t know about it? If  you are funny , if you have skills in acting , you know how to dance or you know how to sing then you can easily become a good YouTuber and earn money through YOUTUBE.  One of my senior KIRAN SHARMA who were using YouTube as a fun but very soon she reached 1160 subscribers. One of my very dear friend Amrin Sultanawho is running YouTube has reached almost 5K subscriber within a 2-3 months and her account has been monetize too. She had earn her first dollar through ads. If you have creative ideas , innovative attitude and entertaining skills then it is one of the best way make money online. You can make a group of 4-5 like minded people and create some plays , singing , dance in local dialects or in cultural values which would be liked by everyone from Pahadi audience.
  3. E- Commerce– One of my friend    Is very good in cooking and uploading all the pictures in social media. This corona outbreak had brought us opportunity as well. Some people had utilize their time learning new cuisines. It will be very inspiring if such talent can be turn into a business ideas. Ideas are very expensive and nobody knows that you can be the next KFC venture holder. If you have ideas then you can utilize internet and  social media platform into a E-Commerce platform with zero investment.
  4. Photography – We have started our own company with the idea of creating something new. You can check it here HinrekphotographyIt has become a new trend in contemporary time that everyone wants to capture their beautiful time and keep these memories throughout life. From Baby shower to baby’s first smile , from Pre-wedding to सात फेरों तक everything has become a fashion to capture in lenses. This field is a open opportunity to all the intelligent and smart guys who can invest their time to create beautiful memories out of the camera. You can pursue a small course of 6-7 month and then start our own photography studio. This is really  a good opportunity in today’s time.                                                                                                       
  5. Makeover and styling– Who don’t know its value today ! गर्लफ़्रेंड से मिलने जाना है   , थोड़ा मेकअप ज़रूरी है ….from birthday party to marriage or  traveling to any event,  everyone prepare themselves in a best look. This is something like one time investment in life and all time returns. There is saying that “कैंची ऐक बार ही लेनी है” but it will last forever. Guys ! if you have some fashion sense and trending style then this field is for you. Just try your luck and I believe you will  rock. These are some fields where we can try our luck alternatively. I know one of my batchmate who started two saloons with the investment of 80000 in Delhi and within a year he owns 6 saloons. One of my colleague invested in library in Okhla, Delhi and he started earning 50-60 K in a month from it. Sometime we think that Goverment services are the criteria or high degree courses can lead us to ultimate success. This is totally a misconception otherwise we would never have MARK JUKERBERG, STEVE JOBS and ELON MUSK type of talent.                                                                                                                                                                THANK YOU & REGARD                                                                                                          LALIT HINREK

 .

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Role of positive attitude in Life

Hello friends !

How are you ? I hope you all are doing really well. Guys this is really a tough time and there are lot of uncertainty all around. In my previous blog I had talked about life that how it works on “Adventure of a silent mind”. You have to understand one thing that attitude is something which defines our life. It can lead us to success or destroy into the mire. So Positive Attitude is something which plays very important role in life.

Attitude are generally two types – 1. Negative Attitude 2. Positive Attitude

Negative – When we don’t see the brighter prospect of any person, any incident or event. It leads us to negativity and it brings so much of impurities to our mind. It impact our peace of mind, stability and brings lot of anxiety, pain, anger and aversion in our life. Guys ! you need to remember one thing in life that you can not please everyone in life. There will be always many people around you who will act like a wolf in the sheep and will hurt you the most but if you see the negative aspect of it , you might get breakdown but if you see the broader aspect you will get to know these people and accordingly you can avoid them in future.

positive attitude

Guys we can built up our positive attitude over the period of time and develop our best form of our physical and mental standard. Now a days it is very unfortunate that people are not able to face problems in their life and they are taking extreme step. We have certain period of time to live and you can not demand all time happiness for sure. Life is a mixture of these ups and down. This is how we learn and grow in life. This pandemic has taught us that how vulnerable we human beings are as a species. A small virus has destroyed our entire health infrastructure and we don’t have any solution to it. So guys it is very important to everyone that Stay at home, Stay Positive, Stay Safe in this tough time. You must have at least 3-4 friend with whom you can talk everything. Built your attitude in a positive way so that you become strong enough to face any circumstances in life.

Regrads

Lalit Hinrek

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Lalit Hinrek

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