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हिसाब

जज़्बात की , फ़िदा की सबात मॉगता हूँ
ख्वाब के शिहाब का हिसाब मॉगता हूँ………!

वो फाजिल तेरी मोहब्बत का है , मेरे मौला
उसकी वफ़ा के इम्तहान का हिसाब मॉगता हूँ ……!

 

सरवत मोहब्बत , रहमत मॉगता हूँ
साक़ी इश्क़ का दीदार मॉगता हूँ……………!

ज़ख़्म की , सितम की , शिफ़ा मॉगता हूँ
दिलग्गी सुखान के जबाब मॉगता हूँ……….!

 

जज़्बात की , फ़िदा की सबात मॉगता हूँ
ख्वाब के शिहाब का हिसाब मॉगता हूँ…………!

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वायरस 🦠virus🦠

समझोगे ये क्या है ?

ये हिन्दू -मुस्लिम से बड़ा है

ये जातिवाद से बड़ा है

ये आज़ादी से बड़ा है

ये शिव शंकर से बड़ा है

अल्लाह , अजान से बड़ा है

मैरी -जीसस से बड़ा है

ये राजनीती से बड़ा है

ये चमचागिरी से बड़ा है

ये धोखाधड़ी से बड़ा है

शाहीनबाग से बड़ा है

आतंकवाद से बड़ा है

समझोगे ये क्या है ?

ये उन कर्मों की सजा है

जब जल में क़ब्ज़ा किया

जलचर के हक़ को छीना

मार मार कर सूना करके

प्रकृति को घायल किया

जब थल में क़ब्ज़ा किया

पत्ती तिनका काट काट कर

जंगल 🌳 को ख़ाली किया

बिल्डिंग का ताना बाना बुनकर

कंक्रीटो का जाल बिछाया

विज्ञान, तरक़्क़ी के नाम – नाम पर

वायु को प्रदूषित किया

जानोगे ये क्या है ?

परिस्थिति भी डर गई

धरती डर गयी

प्रकृति डर गयी

Beware Humans👉 “Mother nature knows very well “The Theory of equilibrium

धर्म डर गया , कर्म डर गया

वायरस 🦠 रूपी दानव से

जैसे हर जीवन डर गया

ये कातिल भी है , भक्षक भी है

ये प्रकृति का संदेशवाहक

और उसकी रक्षक भी है

कहने आया अब बहुत हुआ

छोड़ो – मॉस भक्षण जीवों का

छोड़ो चीर हरण प्रकृति का

छोड़ो प्रदूषण धरती 🌍 का

वक़्त ठहरते समझ जाओगे तो

अगली पीढ़ी बचा पाओगे

ना समझोगे नाज़ुक छण को तो

उजड़ा इतिहास दफ्न हो जाओगे

समझोगे ये क्या है ?

 

 

 

 

 

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क्या बात है ?

कभी जीत की तमन्ना लिये उठ जाओ

तो क्या बात है ….।।

कभी ठान लो नेकी की राह

तो क्या बात है ……।।

कभी बॉट लो हिस्से की थोड़ी ख़ुशी

तो क्या बात है …….।।

कभी बुझ गये सपनों को नये पंखो से उड़ा दो

तो क्या बात है …… !!

कभी रूठे हुऐ साथी को माफी दो

तो क्या बात है …….।।

कभी दुश्मन को गले से लगा लो

तो क्या बात है ………।।

Continue until you find what makes a difference ~thelostmonk

कभी ईमान से कुछ तमग़े पा लो

तो क्या बात है …..।।

कभी वतन को इंकलाब बना लो

तो क्या बात है ………।।

कभी इक आध सच्चा दोस्त पा लो

तो क्या बात है …….।।

कभी बापू की थपकी पा लो

तो क्या बात है ……।।

कोई छोटा जो मुखौटा जी ले

तो क्या बात है ……. !!

कभी कोई कहानी बना दे

तो क्या बात है ……..!!

कभी जीत की तमन्ना लिये उठ जाओ

तो क्या बात है……..!!

 

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मैं और तू

(When you have love in your heart , you will have peace in your mind ~ thelostmonk )

 

मैं बादल का घेरा हूँ

और तू रिमझिम सी वर्षा है

मैं बिखरा सा ऐक तिनका हूँ

और तू फूलो की छाया है

मैं मिट्टी की मूरत हूँ

तू ख़ुशियों की काया है ।

मैं दीपक का बाती हूँ

तू रौशनी की ज्वाला है ।

(Dedicated to one who once fall in love …..!!) 🌸💫💫

मैं कविता का “मोहन” हूँ

तू जोगन सी “मीरा” है

मैं “ललित” कला का इक राग हूँ

तू सम्पूर्ण संगीत की लीला है ।

मैं पतझड़ की सूखी टहनी हूँ

तू जीवन बसंत की “सतरंगी” है

मैं पनघट का बहता पानी हूँ

और तू झरनो की काया है ।

मैं क़ागज , कलम, किताब हूँ

और तू स्याही का दरिया है ..!

मैं रेत , पानी , मिट्टी हूँ

और तू जीवन का साया हैं ।

मैं बादल का घेरा हूँ

और तू रिमझिम सी वर्षा है ….!!

By ~ thelostmonk

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कौन हूँ मैं ?

(A life of a spy )

मैं सुदृढ़ तो राष्ट्र सुदृढ़ होगा ,

मैं कमजोर तो , राष्ट्र बिखरेगा ।

राष्ट्र सुरक्षा की अलग परिभाषा हूं मैं,

कर्तव्यनिष्ठा की जैसे व्याख्या हूं मैं ,

प्रखर ,प्रचण्ड , चाणक्य का नाम हूं,

तेजस्वी सूरज हूं लेकिन गुमनाम हूं ।

मरू की तेज धूप मे भीे तपता हूं मैं,

बर्फीले तूफानो मे भी चलता हूं मैं,

सदैव काक चेष्टा रखता हूं मैं,

स्वरूप अनुरूप बदलता हूं मैं ।

I’m faceless, I’m anonymous
I’m a beggar & I’m a king 👑

मैने तमगो की कभी चाहत नही की ,

मातृभूमि के इतर कोई मोहब्बत नही की ,

निष्काम भाव से बढ़कर कोई ईमान नही मेरा,

राष्ट्र भक्ति से बढ़कर कोई अभिमान नही मेरा ।

गोलियों से तीखी तो मेरी कलम की धार है,

अग्रगामी आसूचना मेरा ऐटमी वार है ,

बिना रक्त के बूंद से , युद्ध जिता सकता हूं मैं,

बिना भनक के अलग देश बना सकता हूं मैं ,

वितरण के बल पे , मैं काम बदलता रहता हूं ,

रम जाये मिट्टी मे , वो नाम बदलता रहता हूं ।

आतंक की वो हलचले , या देशद्रोही साजिशें ,

अवरोध बन प्रबल खड़ा , विफल करू मैं ख्वाहिशें ।

कभी रंक हूं मैं , कभी राजा हूं मैं

कभी संत हूं मैं, कभी ख्वाजा हूं मैं,

संगीत के धुनों का राग हूं मैं

जल जाये पानी मे वो आग हूं मैं,

मिल जाये हमसफर तो पीता हूं मैं,

मिल जाये कोई लम्हा तो जीता हूं मैं,

कोई नाप ना सके वो गहराई हूं मैं,

कोई देख ना सके वो परछाई हूं मैं,

प्रकृति की भाषा और व्याकरण का स्वर हूं मैं

भेष बदला मानो कोई गुप्तचर हूं मैं ।

ना शर्म ना लिहाज है , वो जुनून मेरे पास है

जैसे तिरंगा मेरा हिजाब है, और एक इन्कलाब है

जय हिन्द , जय हिन्द , जय हिन्द ।